
है वक़्त नया आने बाला
आ देखें अब क्या है होने बाला
आने बाले के स्वागत में
बुन लो अब फूलों की माला
जीवन है मधुकर रस का प्याला
जो बीत गया बह जन्म न था
वह तो था वस एक मकड़ी का जाला
जो आयेगा वो पाओगे
वो ही होगा रस का प्याला..
मत रूठ अभी ये झूठ नहीं
ये नहीं कोई है मधुशाला
जिसमे बहते उन शब्दों को
कह दे कोई रस का प्याला
मै सत्य वचन ये कहती हूँ
कि मिल जायेगा तुझको तेरा "लाला"
जीवन है मधुकर रस का प्याला .....
यह मेरी मामी जी के गर्भ में जब तीन संतानों का अंत हो जाता है.
और बह व्याकुल थी कंही फिर बैसा न हो जाये लेकिन आज
जब उन्होंने एक सुंदर शिशु को जन्म दिया
4 comments:
सुंदर कविता ,
नवजात शिशु स्वस्थ और खुशहाल जीवन जिए .इसी कामना के साथ
sahityasurbhi.blogspot.com
शुभकामनायें आपको !
विभा जी नवजात बालक को शुभ आशीष! इस अवसर पर आपने जो कविता लिखी है वह भी बेहतरीन है.
achhi kavita
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