Tuesday, February 8, 2011

वक़्त का रुख

हर राश्ता आसान नहीं होता
हर आदमी परेशां नहीं होता
होता है वक़्त का रुख
जो हर किसी पर मेहरवान नहीं होता

किसी को रंक बना देता है
किसी को ताज दिला देता है
किसी को उंगलियों पर गिनकर
भी इंसाफ दिला देता है

किसी की जान जाकर भी
उसकी सच्चाई का इंसाफ नहीं होता
हर किसी पर ये वक़्त मेहरबान नहीं होता
ये हवा का झोखा है जो हर किसी के आस-पास नहीं होता

हर किसी पर ये वक़्त मेहरबान नहीं होता...


4 comments:

Kailash C Sharma said...

हर किसी पर ये वक़्त मेहरबान नहीं होता...

सार्वभौमिक सत्य का बहुत सुन्दर चित्रण..बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति..शुभकामनायें..

http://sharmakailashc.blogspot.com/
http://bachhonkakona.blogspot.com/

Roshi said...

good

Roshi said...

bahut sunder abhivyakti hai.

IRFANUDDIN said...

very true.... ye waqt hi hai jo insaan per meharbaan ho jaye to sab theek hai... otherwise any thing is possible....

Thanx for coming at my blog and following.... i am honored...:)

Keep writing and do visit my space in future.....

Best wishes,
irfan